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Panchgavya Academy

वैदिक अकादमी फॉर पंचगव्य एज्युकेशन

वापे पंचगव्य आयुर्वेद शिक्षा केंद्र

गोकृपा प्रोडक्टस, जस्दन, राजकोट द्वारा उपक्रमित

अकादमी के विषय मे

आज के समय मे समस्त मानव जाती को समग्र स्वास्थ्य समाधान की सुविधा प्रदान करने की अति आवश्यकता है । दुनिया का हर एक व्यक्ति किसी ना किसी बीमारी से पीड़ित है। इनसे छुटकारा पाने के लिए अगर कोई आधुनिक चिकित्सा, जैसे एलोपथी का इस्तमाल करता है तो अन्य कई बीमारिया जनम लेती है।

सारी बीमारियो का हल आयुर्वेद मे है। आयुर्वेद का अर्थ ही जीवन का विज्ञान है। आयुर्वेद न केवल बीमारियो को ठीक करता है बल्कि वो इसप्रकार का ज्ञान हमे प्रदान करता है की बीमारी ही न हो।  आयुर्वेद मे विभिन्न जड़ी बूटियोको विशिष्ट रूप से मिश्रित करके दवाई का निर्माण होता है। इन प्रक्रियाओमे गाय से निर्मित गोमूत्र, गोबर, गोदुग्ध, गोतक्र, गोघृत इन सबका इस्तेमाल होता है। इन पाचोको को मिलकर पंचगव्य कहा जाता है।

पूरी तरह से नैसर्गिक वातावरण मे उत्पादित आयुर्वेदिक जड़ी बूटियोंके कमी के कारण, केवल पंचगव्य का उपलब्ध जड़ीबूटियों के साथ मिश्रण करके दवाईया बनायी जा रही है और इसी के कारण चिकित्सा का एक नया क्षेत्र, जो असल मे लाखो वर्ष पुराना है, एक नया रूप लेके पंचगव्य चिकित्सा के नाम से उभरित हुआ है।

हम पिछले दस सालो से, गोकृपा प्रोडक्टस के द्वारा, अंधरूनी और बाहरी रूप मे काम आने वाली पंचगव्य की दवाईयो का निर्माण करते आ रहे है।  हमे लगता है की इस पंचगव्य विज्ञान को एक कोर्स के रूप मे पढ़ाना जाना चाहिए। इस बात को प्रत्यक्ष रूप मे लाने की लिए हमने वैदिक अकादमी फॉर पंचगव्य एजुकेशन की स्थापना की है, जिसके द्वारा इस विज्ञान को पूरे समाज मे प्रसारित किया जा रहा है।  

'पंचगव्य थेरेपी

भारत सरकार ने इस पंचगव्य विज्ञान को अलग चिकित्सा के रूप मे मान्यता दी है। सरकार के आयुष विभाग के अंतर्गत पंचगव्य चिकित्सा को एक विशेष स्थान प्राप्त हुआ है।

इस संदर्भ मे आयुष ने अपने संकेतस्थल पे एक लेख प्रकाशित किया है। http://pib.nic.in/newsite/PrintRelease.aspx?relid=116073 उसका हिन्दी अनुवाद नीचे दिया है-

27-February-2015 13:23 IST

पत्र सूचना कार्यालय

भारत सरकार

आयुष

पंचगव्य चिकित्सा

गाय से प्राप्त दूध, दहि, गोबर, मूत्र, घी इन पाँच चीजोंको एकत्रित रूप मे पंचगव्य कहा जाता है।   पंचगव्य और इसके घटकोंका, जिसमे गोमूत्र भी शामिल है, औषधीय उपयोग का वर्णन आयुर्वेद के प्रमाणित ग्रंथो मे किया गया है। ड्रूग अँड कोस्मेटिक एक्ट,1940 के तहत इन ग्रंथो का वर्णन प्रथम भाग मे आता है। कृमि रोग, कुष्ठ, कंडू, शूल, गुल्म, उदर रोग, अनह, शोथ, पंडु, कमल, वस्ती रोग, कास, श्वास, अतिसार, मूत्र रोग आदि रोगोंपर पंचगव्य का आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति मे इस्तेमाल होता है।   कई सारे आयुर्वेदिक दवाईयोंका गोमूत्र एक घटक है और इसका इस्तेमाल सहायक गुणवर्धक औषधि के रूप मे भी होता है। औषधीय वस्तुओंके शोधन और भावना प्रक्रियाओंमे गोमूत्र इस्तेमाल होता है।

भारत सरकार के अधीन एक स्वायत्तय शासी निकाय, केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद ने पंचगव्य घृत के संबंध मे एक संशोधन कार्य शुरू किया है जिसके अंतर्गत इसके रोगप्रतिकारक क्षमता को बनाए रखने का कार्य और इसकी सुरक्षितता का मूल्यांकन हो रहा है।  पंचगव्य घृत को गाय से प्राप्त पाँच चीजों से बनाया जाता है और इसका उल्लेख आयुर्वेद के शास्त्रीय ग्रंथो मे तथा भारतीय आयुर्वेद सूत्र संहिता के प्रथम भाग मे आता है। वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद ने गो विज्ञान अनुसंधान केंद्र, नागपुर के सहयोग से गोमूत्र अर्क के ऊपर अपनी प्रयोगशालाओंमे संशोधन किया है, जिसके तहत गोमूत्र के प्रतिचायक एवं जैविक सुधारिकरण के गुणों को संकामक विरोधी और केंसर विरोधी घटक एवं पोशाक द्रव्य के रूप मे जाँचा गया।  सन 2002 से लेकर आजतक चार अमेरिकी पेटेंट प्राप्त हुए हे और एक दवा भी बाजार मे उपलब्ध है, जिसमे अपने परिचायक गुणों सहित गोमूत्र अर्क है।  

देश मे आयुर्वेद दवाईया बनानेवाले 7835 अनुज्ञापित इकाईयोमेसे बहोतसी कंपनिया पंचगव्य से निर्मित दवाईया बनाती है। पंजाब, केरल, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, ओड़ीशा, हरियाणा प्रदेशो मे क्रम से 229, 200, 5, 3, 3, 2 इतनी कंपनिया पंचगव्य चिकित्सा के उत्पाद बनाती है। आयुर्वेद दवाईयोको बेचनेके लिए उत्पादित करने और उनकी गणवत्ता को बनाए रखने का नियमन  ड्रूग अँड कोस्मेटिक एक्ट,1940 और नियम 1945 के तहत किया जाता है। औषधि उत्पाद बनाने हेतु अपने प्रदेश अनुज्ञप्ति अधिकारी से अनुज्ञापत्र प्राप्त करना आवश्यक है और अच्छे विनिर्माण कार्यपद्धति का अवलंब करना अनिवार्य है।. नामपत्र चिपकाने और दवाई का जीवनावधि निश्चित करने के मानक भी ड्रूग अँड कोस्मेटिक एक्ट,1940 के तहत निर्धारित किए गए है। प्रदेश अनुज्ञप्ति अधिकारी से अच्छे विनिर्माण कार्य पद्धति का आदेशात्मक प्रमाणीकरण करने हेतु व्यवस्था और ड्रूग्स कंट्रोलर जनरल एवं क्वालिटी कौंसिल ऑफ इंडिया से ऐच्छिक रूप से उत्पादों की गुणवत्ता का प्रमाणीकरण करने की व्यवस्था मौजूद है।

आयुर्वेद के स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम मे पंचगव्य और इसके घटकों की पढ़ाई एक हिस्सा है।  अनुरक्त विद्वान एवं वैज्ञानिको के लिए पंचगव्य मे स्नातकोत्तर और उससे भी आगे संशोधन तथा बाह्य अनुसंधान के लिए संधिया उपलब्ध है। केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद ने 2014 साल मे पंचगव्य चिकित्सा के ऊपर प्रचार प्रसार हेतु एक राष्ट्रीय परिषद का आयोजन किया था और इस परिषद मे पंचगव्य तथा उसके घटकोंपर प्रकाशित संशोधन पत्रिकाओंका संकलित दस्तावेज़ निकाला।  पंचगव्यपर प्रकाशित संशोधन पत्रिकाए ‘आयुष संशोधन स्थल’ पे सार्वजनिक अभिगम के लिए रखा गया है।

इस जानकारी को आयुष के केंद्रीय राज्य मंत्री श्री श्रीपाद यशो नाईक ने आज लोकसभा मे एक प्रश्न का उत्तर देते समय प्रस्तुत किया।

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ऊपर दीया हुआ पत्रक पंचगव्य चिकित्सा को भारत सरकार द्वारा मिले हुए प्रमाणीकरण की स्पष्ट रूप से पुष्टि करता है। 

भारत सरकार ने नेशनल स्किल डेवलपमेंट एजंसी के रूप मे सन 1952 मे भारत सेवक समाज की स्थापना की। भारत सेवक समाज के अंतर्गत ही पंचगव्य चिकित्सा पर आधारित मास्टर डिप्लोमा एवं डिप्लोमा कोर्स का प्रावधान किया गया है। लिंक: www.bssve.in

वैदिक अकादमी फॉर पंचगव्य एजुकेशन भारत सेवक समाज द्वारा पंचगव्य शिक्षा प्रदान करने हेतु प्रमाणित की गयी है। 

BSS Certification - Vedic Academy For Panchagavya Education

 

पाठ्यक्रम

इसमे 4 मुख्य विषय है। वे इस प्रकार है-

विषय 1 पंचगव्य परिचय – आयुर्वेद जीवन का विज्ञान

  • जीवन का लक्ष्य – कृष्ण भावना और आरोग्य

- वर्णाश्रम और वैदिही भक्ति

- भक्तिमय जीवन मे सही रूप से कर्म – मन बुद्धि अहंकार – स्वभाव

– शरीरम आद्यम खलु धर्म साधनम

– धर्म अर्थ काम मोक्षार्थम आरोग्यम मुलम उत्तमम

  • आयुर्वेद परिचय

- अष्ट अंग

- दिनचर्या अध्याय

- वात पित्त कफ का अल्प परिचय

  • भगवद गीता आयुर्वेद के संबंध मे

- मन बुद्धि अहंकार का वात पित्त कफ के साथ संबंध

- सत्त्व रजस तमस और वात पित्त कफ

- 4 वर्ण के कार्य और वात पित्त कफ

  • पंचमहाभूत और पंचगव्य  

- परिचय

- संबंध

- रोग का तत्त्वज्ञान

       - कर्म – आचार – विचार – आहार – विहार

- रोग निर्मूलन मे पंचगव्य का सहभाग

  • पंचगव्य की जरूरत

- आधुनिक चिकित्सा पद्धतीय और उनके परिणाम

- आधुनिक चिकित्सकोंद्वारा जनता की लूट 

  • गौमता के विषय मे शास्त्रीय प्रमाण

- जर्सी गाय और गौमता

विषय 2 पंचगव्य प्रयोग- आयुर्वेदिक रोग निदान एवं उपचार

  • मानव शरीर रचना और क्रिया शास्त्र

- 12 महत्त्वपूर्ण अंग

- शरीर की घड़ी

  • नाड़ी विज्ञान

- त्रिदोष सिद्धान्त

- वात पित्त कफ धातु मल

- इनमे क्षय और वृद्धि के परिणाम

- नाड़ी के प्रकार, गति

- नाड़ी देखने का सरल मार्ग 

  • आहार

- पथ्य – अपथ्य

- गुण, वीर्य, विपाक ई॰ 

  • नाभि विज्ञान

- नाभि सरकने के कारण एवं परिणाम

- नाभि को बिठाने के तरीके

  • प्रत्यक्ष निदान प्रक्रिया

- दर्शन – स्पर्शन – प्रश्न

- शरीर के बाहरी अंगो से रोगो की पहचान – नाखून, मुख, होंठ ई॰

- नाड़ी परीक्षा से रोग का निदान

- अन्य चिकित्सा पद्धतियों के रिपोर्ट को समजना

- आधुनिक उपकरणो का इस्तेमाल

  • औषधि उपचार

- आयुर्वेदिक जड़ी बूटियोका प्राथमिक ज्ञान

- रोगी के अनुसार दवाई प्रयोग

  • प्रजनन तंत्र के रोग

- पुरुष एवं स्त्री के प्रजनन अंगो का ज्ञान और उनकी चिकित्सा

- अच्छे नैसर्गिक प्रजनन के लिए गर्भसंस्कार 

  • रोग के प्रकार और उनके उपचार

- प्रिस्क्रिप्शन लिखना

- वात पित्त कफ एवं बाल रोग

- केन्सर, हृदय रोग, विषाणुजन्य रोग, ई॰ रोगो की चिकित्सा   

  • एलोपेथिक एवं होमिओपेथिक दवाइओंका प्राथमिक ज्ञान
  • मर्म चिकित्सा

विषय 3 पंचगव्य औषधि निर्माण  

  • पंचगव्य संग्रह

- संग्रह के नियम  

- संग्रह के तरीके और प्रक्रिया

- क्षारीय एवं जलीय अंश

  • गौमूत्र अर्क का निर्माण

- तरीके

- जड़ी बूटियोंका मिश्रण

  • गौमूत्र घनवटी का निर्माण
  • खानेयोग्य दवाइयोंका निर्माण
  • बाहरी अंगो को लगानेयोग्य दवाइयोंका निर्माण
  • पंचगव्य घरेलू उत्पाद का निर्माण
  • पंचगव्य उत्पादोंकी पैकेजिंग

विषय 4 गौशाला निर्माण-नियोजन और गौमाता का स्वास्थ्य रक्षण 

  • गौमता का स्वास्थ्य रक्षण

-आहार

- विभिन्न बीमारियोंपर आयुर्वेदिक और होमेओपथिक औषधि

- प्रसूति

- दूध निर्मिति

  • बैलोंका नियोजन

- सांड का निर्माण

- खेती मे बैलोंकी उपयोगिता

- बैलोंद्वारा बिजली उत्पादन, घानी तेल का निर्माण

  • गौशाला निर्माण
  • गौसेवकोका नियोजन
  • गौशाला हिसाब किताब
  • जैविक खेती

- प्रक्रिया

- जैविक खाद उत्पादन

- गौमता के लिए जैविक खाद उत्पाद

- आयुर्वेदिक जड़ी बूटी की खेती

  • बायोगॅस का निर्माण, CBG का निर्माण

 

आवेदन प्रक्रिया

पाठ्यक्रम अवधि : 1 साल

1 साल मे कुल 3 प्रशिक्षण शिविर रहेंगे। प्रत्येक शिविर 4 से 6 दिन का रहेगा। आखरी शिविर मे लिखित परीक्षा होगी। ये शिविर वापे जस्दन, राजकोट यहापे होंगे, तो विद्यार्थियोंकों शिविर के लिए जस्दन आना पड़ेगा।

सन 2015 का प्रथम शिविर 4 जुलै से 7 जुलै के दौरान है।

आपको 3 जुलै के शाम 5 बजे तक जस्दन पोहोचना है। जस्दन पोहोचने के लिए राजकोट से सीधी बस मिलती है जो आपको 2 घंटे मे राजकोट से जस्दन पोहचाएगी। अहमदाबाद से भी जस्दन के लिए सीधी बस उपलब्ध है जिससे 5 घंटा लगता है। आप अपनी ट्रेन टिकट इस तरह ले की राजकोट आप दोपहर 2 बजे तक पोहोच जाये और अगर अहमदाबाद से आ रहे हो तो दोपहर 12 बजे तक पोहच जाइए।

शिविर की आखरी कक्षा 7 जुलै को शाम 6 बजे समाप्त हो जाएगी तो आप अपनी वापसी की टिकिट इस तरह ले तो बेहतर होगा की अहमदाबाद से वापसी करने वाले 8 जुलै की दोपहर 12 बजे की बाद वाली टिकट कटाये और राजकोट से वापसी करने वाले 7 जुलै को शाम 9 बजे के बाद की टिकट कटाये।

शुल्क: रू॰ 15,000  

इसमे 3 शिविरो के रहने, खाने, प्रशिक्षण शुल्क, परीक्षा शुल्क का अंतर्भाव है।

आवेदन शुल्क रु. 3000 है। 20 जून से पहले इसे हमारे बैंक खाते पे जमा कराए और sms से इत्तिला करे। 

Account Details:

Account Name : Gokripa Products
Bank : Bank of Baroda
Branch: Jasdan. Dist : Rajkot
Current A/c no.: 33490200000113
IFSC CODE : BARB0JASDAN

आवेदन के लिए आवश्यक सामग्री :

दस पासपोर्ट आकार के चित्र।

चार-चार प्रति जन्म प्रमाणपत्र एवं शिक्षा अंक-सूची प्रमाणपत्र की प्रतिलिपीया।

चार प्रति आवासीय प्रमाण की प्रतिलिपी।


शपथ-पत्र 

१. सभी तरह के यात्रा खर्च विद्यार्थियों को वहन करने होंगे।

२. ठहरने एवं सोने की व्यवस्था ग्रामीण एवं सामूहीक स्तर की रहेगी।

३. भोजन शुद्ध शाकाहारी एवं यथासंभव जैविक होगा।

४. पाठ्यक्रम एवं प्रशिक्षण शिविर के दौरान मांसाहारी भोजन, डिब्बाबंद/बाहरी भोजन, कोल्ड्रिंक,

सिगरेट, बीडी, शराब तथा किसी भी प्रकार का नशा कड़ाई से प्रतिबंधित रहेगा।

५. पाठ्यक्रम एवं प्रशिक्षण शिविर के दौरान मोबाईल, कैमरा, लेपटाप एवं अन्य किसी भी प्रकार का

इलेक्ट्रोनिक सामान लाना एवं उपयोग करना मना है।

६. सभी विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम एवं प्रशिक्षण शिविर शुरु करने से पहले अपना इलेक्ट्रोनिक

सामान जमा करना अनिवार्य रहेगा। अन्यथा किसी भी चोरी कि घटना मे विद्यार्थी स्वयं जिम्मेदार रहेगा।

७. किसी भी प्रकार के अस्वस्थ एवं रोगी व्यक्ति इस पाठ्यक्रम एवं प्रशिक्षण शिविर मे भाग नही

ले सकते है।

८. पाठ्यक्रम एवं प्रशिक्षण शिविर के दौरान कोई भी विद्यार्थी अपने किसी परिजन या बच्चे को साथ लेकर नहीं आ सकते है।

९. कृपया अपने साथ किसी भी तरह का कोई मुल्यवान वस्तु जैसे आभुषण, इलेक्ट्रोनिक सामान

आदि नहीं लाये।

१०. विद्यार्थियों को अकादमी कि दिनचर्या का सख्ती से पालन करना होगा।

११. किसी भी तरह कि चोट, दुर्घटना या मृत्यु होने पर विद्यार्थी स्वयं जिम्मेदार होगा एवं किसी भी

तरह का बीमा या हर्जाना हमारी ओर से देय नहीं होगा।

१२. यदि कोई विद्यार्थी किसी भी तरह के गैरकानूनी कार्य जैसे चोरी,  मारपीट,  महिला विद्यार्थियों के

साथ छेड़खानी करते हुए पाया गया तो उसे तुरंत पाठ्यक्रम एवं प्रशिक्षण शिविर से निष्कासित

कर दिया जायेगा।

१३. पाठ्यक्रम एवं प्रशिक्षण शिविर के दौरान केवल भारतीय परिधान ही स्वीकार्य होंगे। किसी भी

तरह के पश्चिमी परिधान जैसे जीन्स, स्कर्ट आदि एवं छोटे वस्त्र प्रतिबंधित होंगे।

१४. आवश्यक होने पर अपने किसी भी नियम एवं शर्त मे बदलाव करने का अधिकार वेदिक अकादमी फॉर पंचगव्य एजुकेशन के पास सुरक्षित रहेगा।

१५. किसी भी विवाद कि स्थिति मे न्यायक्षेत्र राजकोट रहेगा।  

 

नजदीक के समय में कोई प्रशिक्षण सिबिर तय नहीं है .
जैसे सिबिर की तारीख निश्चित की जाएगी वेब साइट पे डाला जायेगा.
अस्तु हरे कृष्ण

 

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